/उज्जैन में बनेगा भव्य जयंतसेन आराधना भवन

उज्जैन में बनेगा भव्य जयंतसेन आराधना भवन


पुण्य सम्राट की 10वी मासिक पूण्यतिथि पर हुआ भूमिपूजन-अरविंद नगर में हुआ मंगल प्रवेश
उज्जैन। नमकमंडी में पूण्य सम्राट् युग प्रभावक श्रीमद् विजय जयंतसेन सुरिश्वर गुरुदेव के नाम पर भव्य जयंतसेन आराधना भवन का निर्माण होगा। जिसका भूमि पूजन गुरुदेव के पट्टधर गच्छाधिपति आचार्य श्रीमद् विजय नित्यसेन सुरिश्वर एवं आचार्य श्रीमद् विजय जयरत्त्न सुरिश्वर महाराज के सानिध्य में चाँदमल प्रताप मेहता परिवार द्वारा किया गया।

भूमि पूजन उपरांत गुरु भगवन्तो का अरविन्द नगर में प्रवेश भव्य प्रवेश जुलुस के साथ हुआ। जुलुस में विभिन्न जगहों पर गवली द्वारा अगवानी की गयी।

वीरेन्द्र गोलेचा ने बताया कि आज भी गुरु भगवन्तो ने सभी की विनती स्वीकार करते हुए मार्ग में आने वाले सभी श्रीसंघ सदस्यों के गृह एवं प्रतिष्ठान में पगलिए कर आशीष प्रदान दिया। जुलुस श्रीसंघ अध्यक्ष मनीष कोठारी के अरविन्द नगर स्थित नवीन गृहांगन पंहुचा। जहा धर्मसभा में श्रीमद् विजय जयन्त सेन सुरिश्वर जी की 10वीं मासिक पूण्य तिथि पर गुरु गुण स्मरण किया गया। स्वागत गीत सीमा कोठारी ने तो स्वागत उदबोधन मनीष कोठारी ने दिया। उर्जामंत्री पारस जैन ने अपने उदबोधन में दोनों आचार्य भगवन्तो को उज्जैन चातुर्मास करने की विनती करते हुए कहा कि यह पूण्य सम्राट् का भी सपना था वे आज शरीर से नहीं पर मन से हमारे पूर्ण रूप से साथ है। संजय कोठारी द्वारा संचालित इस सभा में सभी ने पूण्य सम्राट् का बड़े ही भावुक मन से स्मरण किया।

पूण्य सम्राट् हमारे आगे आगे चल रहे है
गच्छाधिपति श्रीमद् विजय नित्यसेन सुरिश्वर ने अपने प्रवचन में पूण्य सम्राट् का स्मरण करते हुए कहा कि माँ के बिना बेटे का और गुरु के बिना हमारा जीवन अधूरा है। मेरा तो पूरा जीवन उनकी सेवा में गुजरा किन्तु पिछले 10 महीने कैसे गुजरे में उसका वर्णन नहीं कर सकता। हम तो जहां भी जा रहे है यही लग रहा है पूण्य सम्राट् हमारे आगे आगे चल रहे है। यह उन्हीं का आशीर्वाद था कि दीक्षा के समय मैने कभी 10 किमी का विहार भी नहीं किया था लेकिन दीक्षा के बाद ही 19 दिन में 450 किमी का पैदल विहार कर लिया। गुरुदेव ने सम्पूर्ण जीवन समाज के लिए ही जिया और समाज के छोटे छोटे बालक को भी बेटे की तरह रखा उन्होंने उनके गुरु के सपने राजेन्द्र नवयुवक परिषद् को आगे बढ़ाया। हमें भी अपनी गुरु के प्रति अटूट श्रद्धा रखना चाहिए।

गुरुदेव ने अनेक भक्तो को नए प्राण दिए थे
आचार्य श्री जयरत्त्न विजय ने अपने प्रवचन में गुरूदेव की महिमा बताते हुआ कहा कि गुरुदेव ने अनेक भक्तो को नए प्राण दिये है, उनके गीत आज भी हमें रुला देते है, उन्हें सही रूप में वही जान सकते है जो इस मनुष्य शरीर में मनुष्य है।

’आज सम्पूर्ण जैन समाज गुरुदेव की रचनाओ को गा रहा है’
मुनिराज चारित्ररत्न विजय ने अपने प्रवचन में कहा कि आज सम्पूर्ण जैन समाज गुरुदेव की रचनाओ को गा रहा है । गुरुदेव की पूण्य तिथि पर आपने सभी को गुरु भगवन्तो के साथ सेल्फ़ी न लेने का संकल्प दिलाया। आपने कहा कि सेल्फ़ी संस्कृति का मतलब अब आपका फोटो लेने वाले भी आपके पास नहीं।

गुरुदेव ने लाखो को जगाया
मुनिराज निपुण रत्त्न विजय ने गुरुदेव के बारे में कहा कि उनके लिए कोई भी छोटा या बड़ा नहीं था, सोते को उठाने वाले तो बहुत मिल जायेंगे लेकिन जगाने वाला नहीं मिलता। गुरुदेव ने लाखों को जगाया उनका उद्धार किया। जो भी गुरु के चरणों में आता है उसका उद्धार हो जाता है।

स्वर्ण युक्त चित्रों का होगा अनावरण
वीरेन्द्र गोलेचा ने बताया कि गुरुभगवंत अपने मुनिमंडल के साथ आज देवास रोड स्थित श्री राजेन्द्रसुरी शताब्दी शोध संस्थान प्रवेश करेंगे जहा प्रवचन एवं स्वर्ण युक्त चित्रों का अनावरण होगा।