/गुरुभगवंतो का हुआ मंगल प्रवेश, घर घर पधारे गुरूवर

गुरुभगवंतो का हुआ मंगल प्रवेश, घर घर पधारे गुरूवर


उज्जैन। पुण्य सम्राट युगप्रभावक श्रीमद् विजय जयंतसेन सुरिश्वर गुरुदेव के पट्टधर गच्छाधिपति आचार्य देवेश श्रीमद् विजय नित्यसेन सूरीश्वरजी महाराज एवं आचार्य श्रीमद् विजय जयरत्न विजय महाराज का ज्ञानमंदिर नमकमंडी में भव्य मंगल प्रवेश जुलूस के माध्यम से हुआ।

वी. डी. मार्केट से प्रारंभ जुलूस 4 घंटे लगातार नगर के विभिन्न मार्गाे से गुजरा जिसमें नवयुवक एवं तरुण परिषद साथी गुरुदेव की नृत्य द्वारा अगवानी करते हुए चल रहे थे तो शहर के विभिन्न महिला एवं बहू मंडल विशिष्ट परिधानों में विभिन्न समूह में नृत्य एवं भक्ति के साथ जुलुस की शोभा बढ़ा रहे थे। जुलुस की विशेषता यह थी कि दोनों गुरु भगवंत जुलूस मार्ग पर आने वाले श्रीसंघ सदस्यों के घरों एवं प्रतिष्ठानों पर पगलिए कर आशीष दे रहे थे, गुरुवरो ने सभी की विनती स्वीकार की।

नवकारसी का लाभ सरदारमल समरथमल कोठारी परिवार ने लिया। जुलूस खाराकुआ स्थित उपाश्रय एवं ऋषभदेव मंदिर दर्शन करता हुआ ज्ञानमंदिर नमकमडी पर संपन्न हुआ। प्रवेश उपरांत रंगमहल धर्मशाला में धर्मसभा हुई जिसकी शुरुआत ऊर्जा मंत्री पारस जैन, राजमल रुणवाल, माणकलाल गिरिया, प्रताप मेहता, अनिल रुणवाल एवं परिषद अध्यक्ष नितेश नाहटा द्वारा दिप प्रज्वलन से हुई। नरेंद्र जी तल्लेरा एवं राकेश बनवट द्वारा सामूहिक गुरुवंदन कराया गया।

बहु परिषद सदस्यों द्वारा स्वागत गीत प्रस्तुत किया गया तो स्वागत उदबोधन श्रीसंघ अध्यक्ष मनीष कोठारी ने दिया। संजय कोठारी द्वारा संचालित इस सभा में गुरुपूजन का लाभ घासीराम कालूराम गिरिया परिवार ने लिया। वीरेन्द्र गोलेचा ने बताया कि दोपहर में 108 पार्श्वनाथ पूजन चांदमल प्रताप मेहता परिवार की और से पढ़ाई गयी।

उज्जैन वालों का प्रेम- सदभाव-विचार-आस्था समृद्ध व मजबूत है

आचार्यश्री जयरत्न विजय ने अपने प्रवचन में उज्जैन की महिमा बताते हुए कहा कि पुण्य सम्राट के सपने उज्जैन में अधूरे नहीं रहेंगे क्योंकि उज्जैन वालों का प्रेम सदभाव विचार आस्था समृद्ध व मजबूत है। गुरुदेव ने भी शोध संस्थान द्वारा यहां एक नई शुरुआत की थी क्योंकि उनके दिल में उज्जैन के लिए विशेष जगह थी। आपने कहा की इस नमकमण्डी में नमक या मिर्ची नहीं बल्कि शक्कर की मिठास ही होना चाहिए। धर्म के प्रति दान चुनचुन कर बचा हुआ नहीं बल्कि गुरुदेव का दिया हुआ समझकर खुले मन से करना चाहिए व समाज का जो सदस्य दान नहीं कर सकता है उसके नाम से संपन्न परिवार को दान करना चाहिए। आपने कहा कि सभी समझते है कि गुरुदेव ने दो आचार्य की घोषणा की थी। पर हम दो नहीं दोनों एक ही है।

’आराधना भवन में दान देने से उसमे होने वाली सभी आराधनाओ का पूण्य मिलता है’। मुनि निपुणरत्न विजय ने अपने प्रवचन में दान की महिमा बताते हुए कहा कि आपके पास जितना है उतना आप किसी को नहीं दे सकते हैं, लेकिन तीर्थंकर ऐसा नहीं सोचते उन्हें मोक्ष का जो सुख मिला है वह उसे सभी को देना चाहते हैं। हर शुभ कार्य की शुरुआत स्वयं से होना चाहिए हम सुधरेंगे तो सभी सुधर जाएग। उज्जैन का संबंध वर्षों से गुरुदेव के साथ रहा है जिस प्रकार नमक के बिना भोजन में आनंद नहीं आता उसी प्रकार नमकमंडी का अपना महत्व है।

गुरुदेव का अभाव भी आज हमें दिख रहा है वें हमेशा संघ के संगठन को देख कर प्रसन्न होते थे। उनका एक एक दिन समाज की महिमा बढ़ाने में ही बीता है। हमें हमारे भव्य घर बनवाने से कुछ फायदा नहीं होगा लेकिन अगर हम आराधना भवन में दान देते हैं तो आराधना भवन में होने वाली सभी आराधनाओ का पूण्य हमें और हमारे परिवार को मिलता है। सभा में अवंती पार्श्वनाथ तीर्थ की प्रतिष्ठा में दोनों आचार्याे को निश्रा प्रदान करने की विनती भी की गयी।

जयंतसेन आराधना भवन का भूमिपूजन
आज 7 फरवरी को जयन्त सेन आराधना भवन हेतु नमक मंडी में क्रय भूमि का दोनों गुरु भगवन्तो की निश्रा में त्रिस्तुतिक श्रीसंघ द्वारा सकल श्रीसंघ की उपस्थिति में प्रातः 7.30 पर भूमि पूजन होगा। प्रातः 8.30 पर दोनों आचार्यश्री भव्य जुलुस के साथ नमकमंडी से अरविंद नगर पधारेंगे। जहा श्रीसंघ अध्यक्ष मनीष कोठारी के नूतन गृहांगण मे प्रवचन एवं गुरु गुण स्मरण के साथ ही श्री सिद्धचक्र महापूजन होगा। संध्या 8.30 पर भव्य भक्ति संध्या में मुम्बई के संगीतकार अपनी प्रस्तुती देंगे।