/2जी स्पेक्ट्रम घोटाले के सभी आरोपी बरी

2जी स्पेक्ट्रम घोटाले के सभी आरोपी बरी

नई दिल्ली। यूपीए-2 के कार्यकाल में हुए सबसे बड़े 2जी स्पेक्ट्रम आवंटन घोटाले पर पटियाला हाउस कोर्ट की स्पेशल सीबीआई ने अदालत गुरुवार को सभी आरोपियों को बरी कर दिया है। कोर्ट ने पूर्व दूरसंचार मंत्री ए राजा, डीएमके सांसद कनिमोझी सहित सभी आरोपी बरी हो गए है।
जज ने केवलर एक लाइन में फैसला पढते हुए सभी आरोपियों को बरी कर दिया। जज ने कहा है कि सीबीआई आरोप साबित करने में नाकाम रही है। विजय अग्रवाल वकील ने कहा है कि जज ने कहा है कि सीबीआई आरोप साबित नहीं कर पाई, इसलिए सभी को बरी किया जाता है।
वहीं, सीबीआई और ईडी ने कहा है कि हाईकोर्ट में इस फैसले को चुनौती देगी।दिल्ली की विशेष अदालत ने 2 जी स्पेक्ट्रम केस के सभी प्रमुख आरोपियों और इससे जुड़े लोगों को फैसला सुनाए जाने के वक्त कोर्ट में मौजूद रहने का आदेश दिया है। आपको बता दें कि इस मामले में सुनवाई 6 साल पहले शुरू हुई थी। 2011 में स्पेक्ट्रम घोटाला सामने आने के बाद कोर्ट ने 17 आरोपियों को शुरुआती दोषी मानते हुए 6 महीने की जेल की सजा सुनाई थी।
2 जी घोटाले से जुड़े कई केस में से एक पर गुरुवार को विशेष अदालत अपना फैसला सुनाएगी। इस केस में एस्सार ग्रुप के प्रमोटर रविकांत रुइया, अंशुमान रुइया, लूप टेलीकॉम के प्रमोटर किरण खेतान उनके पति आई पी खेतान और एस्सार ग्रुप के निदेशक विकास सरफ मुख्य आरोपी हैं।2 जी घोटाले में जब सीबीआई ने पहला केस दर्ज किया था तो उसमें ए राजा और कनिमोझी को टेलीकाम सचिव रहे सिद्धार्थ बेहुरा, डी राजा के निजी सचिव रहे आरके चंदौलिया, स्वान टेलीकॉम के प्रमोटर शाहिद उस्मान बलवा, विनोद गोयनका, यूनिटेक लिमिटेड के एमडी संजय चंद्रा और रिलायंस ग्रुप के गौतम दोषी, सुरेंद्र पिपरा और हरी नायर को मुख्य आरोपी बनाया था। इस सभी को ट्रायल का सामना करना पड़ा था।
30 हजार 984 करोड़ रुपये का हुआ था घोटाला-
अक्टूबर साल 2011 में कोर्ट ने इन कंपनियों के खिलाफ आईपीसी की कई धाराओं में भ्रष्टाचार अधिनियम और रोकथाम के तहत धाखाधड़ी, जालसाजी, नकली दस्तावेजों का इस्तेमाल, सरकारी अधिकारियों के भ्रष्टाचार में शामिल होने और रिश्वत लेने से लेकर आपराधिक साजिश रचने तक के मामले में आरोप तय कर दिए थे।
अप्रैल 2011 में सीबीआई ने जो चार्जशीट फाइल की थी उसमें ए राजा समेत अन्य आरोपियों पर 2जी स्पेक्ट्रम के 122 लाइसेंसों के आवंटन में 30 हजार 984 करोड़ रुपये राजस्व का नुकसान कराने का आरोप लगाया था। इसके बाद 2 फरवरी 2012 को सुप्रीम कोर्ट ने इस सभी आवंटन और लाइसेंस को पूरी तरह रद्द कर दिया था। सीबीआई के चार्जशीट में एस्सार ग्रुप के प्रमोटर, लूप टेलीकॉम और सर्राफ, लूप टेलीकॉम लिमिटेड, लूप मोबाइल इंडिया, और एस्सार टेली होल्डिंग को भी मुख्य आरोपी बनाया गया था।